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धनबाद जिला परिषद में मचा कोहराम ,अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के बीच टकराव चरम पर, अविश्वास प्रस्ताव की सुगबुगाहट तेज

*धनबाद :* जिला परिषद में सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है. अध्यक्ष शारदा सिंह और उपाध्यक्ष सरिता देवी के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और अविश्वास प्रस्ताव की सुगबुगाहट ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है.
जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है. दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं और बोर्ड के सदस्यों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं. अध्यक्ष खेमे की ओर से कई दौर की गोपनीय बैठकें हो चुकी हैं और सूत्रों के अनुसार 22 सदस्यों के समर्थन के साथ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी लगभग पूरी बताई जा रही है. दूसरी तरफ उपाध्यक्ष गुट भी सक्रिय हो गया है. फिलहाल उनके साथ 10 से 12 सदस्य बताए जा रहे हैं, लेकिन समर्थन बढ़ाने के लिए लगातार संपर्क साधा जा रहा है.
झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है, जबकि प्रस्ताव पास कराने के लिए तीन-चौथाई यानी 45 में से 34 वोट की जरूरत होती है.बता दें कि 2022 में हुए पंचायत चुनाव के बाद शारदा सिंह अध्यक्ष और सरिता देवी उपाध्यक्ष चुनी गई थीं. शुरुआत में तालमेल ठीक रहा, लेकिन समय के साथ विवाद गहराता चला गया.
*जिला परिषद में भ्रष्टाचार के आरोप*
उपाध्यक्ष सरिता देवी ने जिला परिषद में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि वह लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं और आगे भी इसे रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों से अनियमितताएं हो रही हैं. बोर्ड की बैठकें समय पर नहीं होतीं और जो विकास योजनाएं पास होती हैं, वे जमीन पर नहीं उतर पातीं.
*अध्यक्ष ने आरोपों को खारिज किया*
वहीं जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिना सबूत के आरोप लगाना गलत है. उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो उसके प्रमाण सामने लाए जाएं. अध्यक्ष का कहना है कि उनकी प्राथमिकता जिला परिषद का राजस्व बढ़ाना है, ताकि विकास योजनाओं को जमीन पर उतारा जा सके.
*सदस्य ने भी व्यवस्था पर उठाए सवाल*
इधर, जिला परिषद सदस्य सुभाष रवानी ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि बोर्ड में विकास की बातें जरूर होती हैं, लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आता. उन्होंने मनमानी और दबाव में काम कराने के आरोप लगाते हुए कहा कि कई मामलों में गड़बड़ी देखने को मिली है, जिसका वह विरोध कर रहे हैं.
फिलहाल धनबाद जिला परिषद में जारी यह सियासी टकराव किस मोड़ पर जाकर रुकेगा, यह देखना दिलचस्प होगा. क्या अविश्वास प्रस्ताव इस विवाद को नया मोड़ देगा या फिर कोई सुलह का रास्ता निकलेगा इस पर सभी की नजरें टकी हुई हैं.

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